दुनिया कैसे बदल रही है? संघर्ष, जलवायु और डिजिटल क्रांति 🌍 (भाग 1/2) | DW Documentary हिन्दी
कच्चे माल, जलवायु परिवर्तन और डिजिटल बदलाव के बीच दुनिया की तेजी से हो रही बदलाओं का विश्लेषण। जानिए कौन जीत रहा है और आगे क्या हो सकता है।

DW Documentary हिन्दी
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कच्चे माल के लिए संघर्ष. जलवायु परिवर्तन. डिजिटलीकरण. ये चीज़ें दुनिया को तेज़ी से बदल रही हैं. कौन जीत रहा है, कौन हार रहा है? आगे क्या होने वाला है? यह फ़िल्म दिखाती है कि दुनिया के सात महाद्वीपों में लोगों का जीवन कैसे बदल रहा है.
2007 में जब ऐपल के मुखिया स्टीव जॉब्स ने आईफ़ोन लॉन्च किया, तब किसी को नहीं पता था कि यह प्रॉडक्ट दुनिया बदल देगा. आज हर कोई अपनी डिजिटल ज़िंदगी जेब में लेकर चलता है. स्मार्टफ़ोन्स दुनिया को जोड़ते हैं और कोई भी इंसान चंद क्लिक्स में कोई भी जानकारी हासिल कर सकता है.
असल में स्मार्टफ़ोन बनाने के लिए देशों और कंपनियों को मिलकर काम करना पड़ता है. इसकी सप्लाई चेन पूरी दुनिया में फैली हुई है. सब कुछ आपस में जुड़ा है.
फिर भी इंटरनेट युग की शुरुआत में की गईं उम्मीदें पूरी नहीं हुई हैं. ग्लोबल चिप निर्माता TSMC के CEO मार्क लियू कहते हैं, "देशों के बीच की सीमाएं मिट जाएंगी. अमीर-ग़रीब के बीच फ़र्क़ कम हो जाएगा. ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है."
इसके बजाय अमेरिका और चीन जैसी महाशक्तियों के बीच तनाव बढ़ रहा है. फिर से देश गुटों में बंट रहे हैं और अपना दबदबा बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. अब ग्लोबल प्रॉडक्शन में केवल सस्ता और अच्छा प्रॉडक्शन ही मायने नहीं रखता है, बल्कि इसमें जोखिमों की संभावना भी शामिल है, क्योंकि हर देश आगे रहना चाहता है. पुराने यूरोप में विकास धीमा हो गया है, लेकिन दुनिया के बाक़ी हिस्से आगे बढ़ रहे हैं. ऐसे में कौन आगे निकल रहा है और कौन पीछे छूटता जा रहा है?
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और डॉयचे वेले की सोशल मीडिया नेटिकेट नीतियों को यहां पढ़ें: https://p.dw.com/p/MF1G
2007 में जब ऐपल के मुखिया स्टीव जॉब्स ने आईफ़ोन लॉन्च किया, तब किसी को नहीं पता था कि यह प्रॉडक्ट दुनिया बदल देगा. आज हर कोई अपनी डिजिटल ज़िंदगी जेब में लेकर चलता है. स्मार्टफ़ोन्स दुनिया को जोड़ते हैं और कोई भी इंसान चंद क्लिक्स में कोई भी जानकारी हासिल कर सकता है.
असल में स्मार्टफ़ोन बनाने के लिए देशों और कंपनियों को मिलकर काम करना पड़ता है. इसकी सप्लाई चेन पूरी दुनिया में फैली हुई है. सब कुछ आपस में जुड़ा है.
फिर भी इंटरनेट युग की शुरुआत में की गईं उम्मीदें पूरी नहीं हुई हैं. ग्लोबल चिप निर्माता TSMC के CEO मार्क लियू कहते हैं, "देशों के बीच की सीमाएं मिट जाएंगी. अमीर-ग़रीब के बीच फ़र्क़ कम हो जाएगा. ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है."
इसके बजाय अमेरिका और चीन जैसी महाशक्तियों के बीच तनाव बढ़ रहा है. फिर से देश गुटों में बंट रहे हैं और अपना दबदबा बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. अब ग्लोबल प्रॉडक्शन में केवल सस्ता और अच्छा प्रॉडक्शन ही मायने नहीं रखता है, बल्कि इसमें जोखिमों की संभावना भी शामिल है, क्योंकि हर देश आगे रहना चाहता है. पुराने यूरोप में विकास धीमा हो गया है, लेकिन दुनिया के बाक़ी हिस्से आगे बढ़ रहे हैं. ऐसे में कौन आगे निकल रहा है और कौन पीछे छूटता जा रहा है?
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Duration
42:26
Published
Sep 16, 2025
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