थाईलैंड का वह रास्ता जिसने जापान को भारत पर हमला करने का मौका दिया 🇹🇭
देखिए इस डॉक्यूमेंट्री में कैसे थाईलैंड का वह रास्ता इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जब जापान ने भारत पर हमला करने का प्रयास किया। पानी से भरे नदियों और प्राकृतिक सुंदरता के बीच छुपे इस रहस्य को जानिए।

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हिलोरें लेती नदियां. अनगिनत नहरें. गरजता हुआ एक झरना, जहां हाथी नहाने आते हैं. और जहां लोग पानी के ऊपर अपने घर बसाते हैं. पानी, जो जीवन का आधार है, यहां हर तरफ़ नज़र आता है. और ट्रेन इन धाराओं के साथ-साथ चलती है.
थाईलैंड में ये नहरें ’खलोंग’ कही जाती हैं और ये पूरे इलाक़े में फैली हुई हैं. यहां की ट्रेनें अक्सर नदियों-नहरों के ऊपर से गुज़रती हैं. और उस ऐतिहासिक पुल के ऊपर से भी, जो ‘ब्रिज ऑन द रिवर क्वाई’ फ़िल्म की वजह से दुनियाभर में मशहूर हो गया.
सफ़र शुरू होता है मे क्लॉन्ग से, जो थाईलैंड की खाड़ी के पास है. यहां ट्रेन ट्रैक के किनारे लगे एक बाज़ार के बीच से गुज़रती है! ट्रेन का हॉर्न बजते ही दुकानदार कुछ सेकंड में अपने स्टॉल समेट लेते हैं और ट्रेन निकल जाने पर फिर से सब कुछ वैसे ही लगा लेते हैं. रास्ते में कभी नमक के खेत दिखते हैं, तो कभी हरी-भरी घनी वनस्पतियां. यहां लोग सदियों से समुद्री पानी से नमक बना रहे हैं.
इसके बाद ट्रेन बैंकॉक से उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ती है. उस रास्ते पर, जिसे ‘डेथ रेलवे’ कहा जाता है. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना ने इसे युद्धबंदियों और बंधुआ मज़दूरों से बनवाया था. आज इस रास्ते का सिर्फ़ एक-तिहाई हिस्सा ही बचा है. लेकिन हेलफ़ायर दर्रे में बना स्मारक, वहां के शोधकर्ता और एक बौद्ध भिक्षु सुनिश्चित कर रहे हैं कि इतिहास का यह दर्दनाक अध्याय भुलाया न जाए.
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थाईलैंड में ये नहरें ’खलोंग’ कही जाती हैं और ये पूरे इलाक़े में फैली हुई हैं. यहां की ट्रेनें अक्सर नदियों-नहरों के ऊपर से गुज़रती हैं. और उस ऐतिहासिक पुल के ऊपर से भी, जो ‘ब्रिज ऑन द रिवर क्वाई’ फ़िल्म की वजह से दुनियाभर में मशहूर हो गया.
सफ़र शुरू होता है मे क्लॉन्ग से, जो थाईलैंड की खाड़ी के पास है. यहां ट्रेन ट्रैक के किनारे लगे एक बाज़ार के बीच से गुज़रती है! ट्रेन का हॉर्न बजते ही दुकानदार कुछ सेकंड में अपने स्टॉल समेट लेते हैं और ट्रेन निकल जाने पर फिर से सब कुछ वैसे ही लगा लेते हैं. रास्ते में कभी नमक के खेत दिखते हैं, तो कभी हरी-भरी घनी वनस्पतियां. यहां लोग सदियों से समुद्री पानी से नमक बना रहे हैं.
इसके बाद ट्रेन बैंकॉक से उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ती है. उस रास्ते पर, जिसे ‘डेथ रेलवे’ कहा जाता है. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना ने इसे युद्धबंदियों और बंधुआ मज़दूरों से बनवाया था. आज इस रास्ते का सिर्फ़ एक-तिहाई हिस्सा ही बचा है. लेकिन हेलफ़ायर दर्रे में बना स्मारक, वहां के शोधकर्ता और एक बौद्ध भिक्षु सुनिश्चित कर रहे हैं कि इतिहास का यह दर्दनाक अध्याय भुलाया न जाए.
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Duration
42:26
Published
Jul 23, 2025
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